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LEAP  AGAINST  POLLUTION  POPULATION  GLOBAL  WARMING  AND  WORK  FOR  SOCIAL  WELFARE

अभियानEnglish

ईश्वर ने सृष्टि के किसी भी पदार्थ की रचना निष्प्रयोजन नहीं की है। सम्पूर्ण सृष्टि की रचना और उसमें भी मानव की रचना में उसका एक महत्‌ उद्‌देश्य छिपा हुआ है। मनुष्य ही ईश्वर की सृष्टि की वह उत्कृष्ट रचना है जिसका निर्माण कर ने उसे अपना दायित्व अप्रत्यक्ष रूप से सौंप दिया है। इसी कारण पन्त जी ने लिखा –

”सुन्दर है विहग, सुमन सुन्दर, मानव तुम सबसे सुन्दरतम्‌”

सत्य और शिव के संयोग से ही यह सुन्दरतम्‌ प्राणी विधाता के समकक्ष हो सकता है क्योंकि सत्य शिव और सुन्दर का समन्वित रूप विधाता का ही है मानव जाति की सृष्टि के पीछे सम्भवतः ईश्वर का यही अभिप्राय रहा होगा कि वह सृष्टि की सेवा वैसे ही करेगा जैसे स्वयं ईश्वर करता है। मानव जाति प्राप्ति के पीछे छिपे इस प्रयोजन को ही इंगित करती गुप्त जी की ये पंक्तियाँ दर्शाती है

”यह जन्म हुआ किस अर्थ कहो, समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो,  कुछ तो उपयुक्त करो तन को….

धन दौलत, जमीन-जायदाद, यश-कीर्ति हम अपने और अपने परिवार के लिए अर्जित करते है परन्तु महत्व की बात ये है कि हमने समाज के लिए क्या किया ? जिस समाज में हमारी आने वाली पीढ़ियों को रहना है। मनुष्य का जन्म केवल अपने लिये नहीं हुआ। सामाजिक दायित्वों का महत्व पारिवारिक जिम्मेदारियों से कहीं अधिक है। सामाजिक जिम्मेदारिया ही मनुष्य को मान प्रतिष्ठा दिलाती है।

देखा जाये तो मानव जीवन की समस्त प्रसन्नता उसके परिवार में निहित होती है। किन्तु यदि परिवार सीमा से अधिक विस्तृत हो जाये तो यही सुख अभिशाप बन जाता है। निर्धनता का एक बडा कारण, अशिक्षा और बढ़ती हुई आबादी है।

आज देश का कोई भाग ऐसा नहीं है जो बढती आबादी के दबाव को महसूस न कर रहा हो। बढती आबादी के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों का दोहन बढता जा रहा है। विकास की रफ्तार पृथ्वी को रौंद रही है। कल कारखाने, गाडियॉ, विलासिता के साधन जहर उगल रहे है, जिसकी छाया उन पशु पक्षियों और वनस्पतियों पर भी पड रही है, जो मनुष्य के लिए जरूरी है। गर्म होती धरती के खतरे से वाकिफ है आदमी, फिर भी अपने बनाये हुये दलदल में धंसता जा रहा है।  

गरीबी, अशिक्षा, बीमारी, बेकारी, रोग, भूख, जातिवाद, साम्प्रदायिकता और भ्रष्टाचार आदि अनेकानेक अप्रत्यक्ष शत्रुओं ने अभी भी हमारे प्यारे देश को जकड रखा है और करोडो लोग इनके पैने नख-दन्तों से क्षत-विक्षत हो कराह रहे है। ये छिपे हुए शत्रु भयावह और दुर्जेय तो है पर अपराजेय नहीं। सौ करोड  हाथों की शक्ति के समक्ष इनका बल तिनके के बराबर भी नहीं ठहरेगा। आवश्यकता इस बात की है कि हम सब मिलकर सच्चे हृदय और स्वच्छ मस्तिष्क से इनसे मुक्ति पाने का उपाय करें। सफलता हमारे कदम चूमेगी और सपनों के भारत के निर्माण का स्वप्न साकार होते देर नहीं लगेगी।

यद्यपि सम्पूर्ण सृष्टि की सेवा का यह कार्य कोई सरल कार्य नहीं है, एक मनुष्य का जीवन इसके लिए अत्यन्त सूक्ष्म है, पर क्या यह सोचकर हम प्रयास करना ही छोड दें। इतिहास साक्षी है कि बडे-बडे परिवर्तनों के पीछे किसी न किसी मानव का चिन्तन अथवा प्रयास रहा है और उसके इस महत्‌ कार्य में जनसाधारण ने भी सोत्साह भाग लिया और कठिन व दुरूह दिखाई देने वाले कार्य को भी सम्भव करके दिखा दिया।

    आइये हम सब मिल कर समाज की दशा और दिशा बदलने के लिये  सार्थक  कदम उठाये और अपने इस अभियान को सफल बनाये।

              “Coming  together  is  beginning, keeping  together  is  progress and  working together  is  a  success.”

आपके द्वारा बनाये गये ग्रुप का नेतृत्व स्वयं आप करेंगे और आपके द्वारा सुझाये एक रचनात्मक कार्यो पर पूरा ग्रुप आपका सहयोग करेगा।

                                                        जन जागृति सेवा समिति
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